बिना सोचे समझे फैसला लेने का परिणाम-Wrong Decision

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गांव के किनारे एक किसान का घर था। घर के सामने ही उस के खेत थे। खेतों में गेहूं की पकी फसल खड़ी हुई थी। खेतों की रखवाली में पूरा परिवार रात दिन लगा रहता था। कई साल बाद इतनी अच्छी फसल हुई थी। सभी लोग प्रसन्ना थे। इस फसल के भरोसे किसान ने कई मंसूबे पूरे करने के विचार बना लिए थे। उसने गाय और बकरी के साथ मुर्गियों तथा बत्तखें भी पाल रखी थी। मुर्गियों और बत्तखों  के लिए घर के बाहर ही दर्दे बना रखे थे। दरवाजे पर ही गाय और बकरियां बंधी रहती थी।
घर के बाई और एक छोटा तालाब था ,मुर्गियां और बत्तखें तलाब तक डोलती रहती थी।
चुगती  रहती थी बत्तखें पानी में तैरती भी थी।
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पास में एक जंगल था। उस जंगल की एक लोमड़ी किसान के घर तक चक्कर लगा जाती थी। एक दिन मौका पाकर वह किसान की एक मुर्गी को ले गई। किसान को बड़ा दुख हुआ। घर के सभी लोग चौकन्ने रहकर मुर्गियों और बत्तखों  की देखरेख करने लगे। लोमड़ी अब और जल्दी-जल्दी चक्कर लगाने लगी , वह बहुत सुबह झूठ – पुट और दिन दुबे के अंधेरे में चक्कर लगाने लगी , मौका पाते ही कभी बत्तख को मार जाति और कभी मुर्गी को ले जाती।

किसान ने लोमड़ी को पकड़ने और मारने के कई उपाय किए लेकिन सफल नहीं हो सका। एक दिन उसने जाल फैलाकर लोमड़ी को पकड़ लिया।  किसान ने उसे तड़पा – तड़पा  कर मारने की सोची।
उसने लोमड़ी की पूंछ में फटे – पुराने कपड़ों को लपेटकर मिट्टी का तेल डाला और आग लगा दी।
लोमड़ी के गले में रस्सी बांधकर एक खूंटे  से बांध दिया पूछ में आग लगते ही लोमड़ी उछल-कूद करने लगी। बच्चे हो – हो करके हंसने लगे कभी लोमड़ी पीछे हट कर गले से फंदा निकालने की कोशिश करती उछल-कूद में रस्सी में आग लग गई और रस्सी टूट गई लोमड़ी निकल भागी।
लोमड़ी ने सबसे पहले पूछने लगी आग बुझाने की सोची। वह सामने ही किसान के खेत में घुस गई वह आग बुझाने के लिए खेत में इधर-उधर दौड़ने लगी , और अपनी पूछ को पौधे से रगड़ती  हुई भागती रही दौड़ती रही देखते ही देखते सारा खेत धूं -धूं  कर जलने लगा। खेत आग की लपटों में भर गया। एक-दो घंटे में किसान की लहलहाती फसल जलकर राख हो गई। किसान के घर में मातम सा छा गया रात को सोते समय उसे नींद नहीं आई वह लेटा लेटा सोचता रहा अपने किए का इलाज का क्या ईलाज।